न्यू टाऊन आश्रम में योग सेवा और स्वच्छता का महा संगम


कोलकाता :अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का पावन पर्व इस वर्ष न्यू टाऊन स्थित अवधूत देवीदास सेवा संस्थान में केवल एक दिवस के रूप में नहीं, बल्कि एक 'महा-अनुष्ठान' के रूप में मनाया गया। योगाचार्य सावन कुमार के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न इस कार्यक्रम ने योगाभ्यास को मानव सेवा और पर्यावरणीय शुचिता के साथ जोड़कर एक नई मिसाल कायम की है।प्रातःकालीन स्वर्णिम किरणों के साथ जब योग की क्रियाएं शुरू हुईं, तो पूरा आश्रम परिसर सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। श्रद्धालुओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने एक सुर में योग, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। योगाचार्य सावन कुमार ने स्पष्ट किया कि, "योग मात्र शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की वह कला है जो व्यक्ति को भीतर से अनुशासित और बाहरी जगत के प्रति संवेदनशील बनाती है।इस आयोजन का सबसे प्रेरक अध्याय 'स्वच्छता अभियान' रहा। गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी के आह्वान पर, योगाभ्यास के तुरंत बाद भक्तगणों और स्थानीय निवासियों ने हाथ में झाड़ू थामी और आश्रम के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया। यह केवल सफाई नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक 'आध्यात्मिक दायित्व' का निर्वहन था।गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने अपने आशीर्वचन में कहा, "स्वस्थ शरीर, स्वच्छ परिवेश और पवित्र विचार ही एक समर्थ समाज की आधारशिला हैं।" उन्होंने उपस्थित जनसमूह को स्मरण कराया कि अवधूत देवीदास सेवा संस्थान सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी के आशीष से निरंतर जल सेवा, वृक्षारोपण और मानवीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार हेतु समर्पित है। योग का अंतिम लक्ष्य ही 'स्व' का कल्याण करते हुए 'समष्टि' (समाज) की सेवा करना है।इस कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण स्थानीय निवासियों का उत्साह था। संस्थान के स्वयंसेवकों और आम नागरिकों की एकजुटता ने यह सिद्ध कर दिया कि जब आध्यात्मिकता सेवा के धरातल पर उतरती है, तो वह समाज में सद्भाव और जागरूकता की एक नई क्रांति लाती है। समापन पर वितरित 'चना-सत्तू' का पारंपरिक पेय भारतीय जीवन-शैली और स्वास्थ्य-संस्कृति के प्रति संस्थान के समर्पण को दर्शाता है।न्यू टाऊन आश्रम में संपन्न यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक 'जन-आंदोलन' का शंखनाद है। इसने समाज को यह बोध कराया है कि योग यदि 'स्वयं को खोजने की यात्रा' है, तो सेवा उस ज्ञान को समाज को समर्पित करने का पावन मार्ग है। योग, स्वच्छता और निस्वार्थ सेवा का यह त्रिवेणी संगम आने वाले समय में भी निस्संदेह समाज को एक स्वस्थ और समृद्ध दिशा प्रदान करता रहेगा।




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