डीवीसी डीएसटीपीएस में राजभाषा कार्यशाला वृक्षारोपण व राजभाषा होर्डिंग का लोकार्पण संपन्न

डीवीसी डीएसटीपीएस में राजभाषा कार्यशाला वृक्षारोपण व राजभाषा होर्डिंग का लोकार्पण संपन्न

हिंदी की शब्द संपदा सभी भाषाओं को एक सूत्र में बाँधती है- कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय कुमार भारती 

अंडाल (अमन राय): उदघाटन सत्र - दिनांक 30.09.2023 को दामोदर घाटी निगम, दुर्गापुर इस्पात ताप विद्युत केन्द्र, अडाल में राजभाषा हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें प्रो. (डॉ.) विजय कुमार भारती, कुलपति, हिंदी विश्वविद्यालय, हावड़ा (प.बं.) की गरिमामयी उपस्थिति हुई। राजभाषा कार्यान्वयन उप समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ मंगल दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। आमंत्रित मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) विजय कुमार भारती को मुख्य महाप्रबंधक व परियोजना प्रधान श्री सुधीर कुमार झा, वरिष्ठ महाप्रबंधक श्री संजय कुमार, महाप्रबंधक श्री सुधीर कुमार व्यास व श्री सुखदेव खान ने नव पौधा, शॉल व राजभाषा स्मृति-चिह्न प्रदान कर अभिवादित किया। कुलपति महोदय ने प्लांट के दिव्यज्योति भवन के सतही तल में राजभाषा हिंदी होर्डिग का लोकार्पण तथा भवन के निकट वृक्षारोपण किया।कार्यशाला सत्र : कार्यशाला में महाप्रबंधक श्री सुधीर कुमार व्यास ने स्वागत भाषण दिया। मुख्य महाप्रबंधक एवं परियोजना प्रधान श्री सुधीर कुमार झा ने कार्यशाला की सफलता की कामना की। उन्होंने कहा कि हिंदी की मुधुरता, सहजता व स्वाभाविकता अनुपम है। उन्होंने प्रत्येक काम में हिंदी का प्रयोग प्रमुखता के साथ करने पर बल दिया। बतौर मुख्य अतिथि प्रवक्ता प्रो. (डॉ.) विजय कुमार भारती ने कार्यशाला के विषय ‘‘वर्तमान परिदृश्य में राजभाषा हिंदी: कार्यान्वयन की चुनौतियाँ एवं समाधान’’ पर बड़ी गहराई के साथ प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्युत का संबंध प्रकाश से है और ये उजाला ही है कि एक भाषा को लेकर हम सब एकत्रित हुए हैं। हिंदी की शब्द संपदा सभी भाषाओं को एक सूत्र में बाँधती है। हिंदी किसी एक की मातृभाषा नहीं है। यह सबकी भाषा है। स्वाधीनता आंदोलन की चेतना के रूप में हिंदी का प्रयोग हुआ। यही कारण था कि बंगाल के चिंतकों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में चुना था। यह अपनी समृद्धि की बदौलत विश्व की तृतीय स्थान पर है। हिंदी की बात अन्य भारतीय भाषाओं को अलग कर नहीं की जा सकती है। हिंदी या बंगला को रोमन में लिखना ठीक नहीं है। अंग्रेजी की तर्ज पर हिदी का अनुवाद करना सही नहीं है। कृत्रिम शब्दों के प्रयोग से भाषा समृद्ध नहीं होती है। सहभागियों से विषयान्तर्गत अभ्यास कराया गया। परिसंवाद सत्र में श्री अक्षय कुमार, श्रीमती संजुलता मोहन्ती, मो. शमीम अहमद, श्री अरविन्द कुमार यादव आदि ने सक्रीय हिस्सेदारी की । हिंदी अधिकारी इस्माईल मियाँ ने कार्यशाला को संचालित किया तथा आयोजन समिति अध्यक्ष उप महाप्रबंधक श्री शिवानंद सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।सहभागिता: कार्यशाला में परियोजना के विभागाध्यक्ष व कार्यालय प्रधान यथा- उप महाप्रबंधक अक्षय कुमार, अरुण कुमार सिंह, अनिल कुमार, वरिष्ठ प्रबंधक संजुलता मोहन्ती, मोहन कुमार जगनानी, योगेश मिलन सहित नामित अधिकारियों व कर्मचारियों ने भाग लिया।


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