जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वयं प्राप्त हो जाती है अनुराधा सरस्वती

जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वयं प्राप्त हो जाती है अनुराधा सरस्वती

दुर्गापुर : शहर के पंचमुखी बालाजी धाम में आयोजित श्रीमद्भ भागवतकथा के छठे दिन कथा व्यास अनुराधा सरस्वती जी कंस का वध, ऊधव गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुकमणि विवाह के प्रसंग का पाठ किया गया.इस दिन कथा व्यास अनुराधा सरस्वती जी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला का वर्णन करते हुए बताया कि भगावन की अनेकतम लीलाओ में श्रीकृष्ण की रासलीला से श्रेष्ठतम है। रास तो जीव का शिव से मिलन की कथा है। रासलीला पर में जीव पर शंका करना या काम को देखना ही पाप है. उन्होने गोपी गीत पर बोलते हुए कहा कि जब जीव में अभिमान आता है तो भगवान उससे दूर हो जाते है लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह होता में होता है उस पर अनुग्रह करते है उसे दर्शन देते है।भगवान श्री कृष्ण के रूकमणी विवाह के प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रूकमणी के साथ संपन्न हुआ लेकिन रूकमणी को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर विवाह किया गया कथा में समझाया गया कि रूकमणी स्वयं साक्षात लक्ष्मी है. वह नारायण से दूर ही नही रह सकती यदि जीव अपने धन अर्थात भगवान के काम लगाये तो ठीक नही तो अन्य मार्गो से हरण हो ही जाता है धन को परमार्थ में लगाना चाहिए। जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वयं प्राप्त हो जाती है। कथा में भगवान श्रीकृष्ण देवी रूकमणी के विवाह उत्सव को धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालु खुशियो से झूम उठे।इस मौके पर सूर्यो केश,राकेश भट्टड़,अशोक अग्रवाल,अनिल सिंह,मोहर कोनार रोहित मोहनका,सोनू शुक्ला,सीपी ठाकुर,विक्की गुप्ता,ओपी सिंह मनोहर चौधरी,प्रबीन गौर,सूरज दास सुजीत यादव आदि उपस्थित रहे.


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