ईसीएल में भव्यता से मना संथाली भाषा दिवस

ईसीएल में भव्यता से मना संथाली भाषा दिवस


सांकतोडिया (अमन राय): कोयला क्षेत्र में सामासिक संस्कृति संस्थापन एवं सौहार्द संबंध अधिस्थापन के उद्देश्य से आज दिनांक 22.12.2022 (दिन गुरूवार) को डिसेरगढ़ क्लब, झालबगान में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के राजभाषा विभाग एवं ( वुमेन इन पब्लिक सेक्टर)विप्स, ईसीएल द्वारा उल्लास व उमंग के साथ संथाली भाषा दिवस समारोह, 2022 का आयोजन किया गया जिसमें कंपनी की निदेशक (कार्मिक) श्रीमती आहुति स्वाईं, महाप्रबंधक(समन्वयन)/अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक के तकनीकी सचिव श्री देवेन्द्र कुमार नायक, महाप्रबंधक (सिविल) श्री अभय कुमार, उप महाप्रबंधक (अधिकारी अधिस्थापना) श्री देवाशीष आचार्या, विभागीय प्रधान (वेलफेयर एवं सीएसआर) श्री बी के झा ,विभागीय प्रधान( कार्मिक एवं औद्योगिक संबंध) मो. मंजूर आलम, विभागीय प्रधान( पीएफ एवं पेंशन) श्री सुब्रत दासगुप्ता, मुख्य प्रबंधक(कार्मिक) श्रीमती कुमारी कुमकुम एवं ईसीएल मुख्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारिगण तथा ईसीएल के विभिन्न खनन क्षेत्रों के क्षेत्रीय कार्मिक प्रबंधकों की गरिमामयी उपस्थिति रहीं। समारोह में मुख्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारीगण तथा क्षेत्रों से आये राजभाषा नोडल अधिकारी, राजभाषा कर्मी की उपस्थिति सराहनीय स्तर की रहीं। समारोह में विप्स, ईसीएल के मुख्यालय एवं समस्त खनन क्षेत्रों एवं अस्पतालों के कोडिनेटर व को-कोडिनेटर ने बढ़-चढ़कर सहभागिता दिखाई। समारोह निदेशक (कार्मिक) के मार्गदर्शन में विप्स, ईसीएल की कोडिनेटर व प्रबंधक (कार्मिक) श्रीमती भाविनी त्रिपाठी द्वारा संचालित किया गया और इस कार्यक्रम को मुख्य रूप से ईसीएल में कार्यरत संथाली कर्मियों, विप्स ईसीएल की टीम एवं राजभाषा प्रमुख श्री अपर्ण घोष द्वारा सुव्यवस्थित किया गया। समारोह में ईसीएल के परियोजनाओं से प्रभावित जनों की भागीदारी प्रशंसनीय रहीं।
आज ही के दिन वर्ष 1855 के दिसंबर माह के 22 तारीख को संथाल परगना का स्थापना किया गया था और इसी दिन वर्ष 2003 में भारतीय संविधान के आठवीं अनुसूची में संथाली भाषा को सम्मिलित करते हुए इसे राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया था। फलतः संथाली समुदाय इस दिवस को संथाल दिवस और संथाली भाषा दिवस ” के रूप में मनाती है। 


ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के समस्त खनन क्षेत्रों में कार्यरत संथाल समुदाय के कर्मठ कामगार और कर्मीगण दशकों से अपना-अपना श्रम राष्ट्र की ऊर्जा आपूर्ति में समर्पित करते आ रहे हैं। साथ ही, कंपनी की परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों में संथाली समुदाय के लोगों की संख्या बहुतायत में है। अतः राष्ट्र व ईसीएल के कामन क्षेत्र में सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा के परिरक्षण व संवर्धन तथा भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार करना ईसीएल परिवार का परम दायित्व है। इसी क्रम में संथाली भाषा दिवस समारोह का आयोजन किया गया ताकि कोयला क्षेत्र से जुड़े हितधारकों में भारतीय संविधान के अनुरूप सामासिक संस्कृति की समझ (verstehen) विकसित हो सके।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि व निदेशक (कार्मिक) श्रीमती आहुति स्वाईं महोदया दवारा कहा गया कि आज ही के दिन वर्ष 2003 में संथाली भाषा को संविधान के आठवीं अनुसूची में स्थान देते हुए राजभाषा घोषित किया गया था। संथाली भाषा को भारत की अन्य भाषाओं के समान ही सम्मान मिलना अत्यंत ही खुशी की बात है और आज यहाँ हम सभी इसी पल को उल्लासपूर्व रीति से मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। हम सभी को यह भाषा सीखनी चाहिए। संथाली लिपि ओल चिकी का व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए। खासतौर से संथाली जनों से अनुरोध है कि वे अपनी लिपि ओल चिकी से परिचित हो, उसको अपने व्यवहार में लाए और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी करें, तभी सही मायने में पंडित रघुनाथ मुर्मु जी के अथक प्रयासों को संबल प्राप्त होगा और उनके सपनें सकार हो सकेंगे। साथ ही, अन्य भाषा भाषी वर्गों से अनुरोध है कि आप भी यह भाषा सीखें और साथ में इसकी लिपि को भी सीखें। समाज में यह सीखने-सीखाने की परस्पर क्रिया सौहार्दपूर्ण वातावरण का निर्माण करती हैं और समाज में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
संबोधन की अगली कड़ी में विशिष्ट अतिथि महाप्रबंधक (समन्वयन) व अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक के तकनीकी सचिव श्री देवेनद्र कुमार नायक द्वारा कहा गया कि उन्हें संथाल समाज के साथ जुड़ने और उनके साथ काम करने का अच्छा अवसर मिला है। ईसीएल के खनन क्षेत्र राजमहल परियोजना में उन्होंने एक लम्बें अरसे तक काम किया है। वहाँ उन्हें माननीय ईश्वर मराण्डी जी को जाननें का अवसर मिला। संथाली महानायक सिद्धू कान्हू और तिलका माँझी के अंग्रेजों के विरूद्ध संघर्ष से प्रेरित हुए तथा सिद्धू-कान्हू की जन्मस्थली भोगनाडीह गाँव में जाकर अपने आपको धन्य माना। उन्होंने आगे कहा कि संथालों का इतिहास मुगल काल से पहले से रहा है। संथाल परगना के बंगाल एवं बिहार गेजेटियर में संथाल समुदाय की सभ्यता, संस्कृति, भौगोलिक परिदृश्य इत्यादि सभी का वर्णन किया गया है। संथाल मूलतः दामिन-ए-कोह क्षेत्र में रहते है। दामिन-ए-कोह का अर्थ होता है Skirt of Hills का एरिया जिसमें उनका निवास स्थान है। यह एक अधिसूचित क्षेत्र है। भारतीय संविधान में उनके अधिकार एवं संरक्षण का वर्णन विस्तार से किया गया है।
महाप्रबंधक (सिविल) श्री अभय कुमार द्वारा अपने स्वागत भाषा में कहा गया कि भारतीय संविधान की अष्टम अनुसूची में 22 भाषाओं को राष्ट्र की राजभाषा का दर्जा प्राप्त है जिसमें से एक भाषा संथाली भी है। साथ ही, संथाली भाषा को पश्चिम बंगाल राज्य एवं झारखण्ड राज्य में भी राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। राजभाषा का दर्जा प्राप्त होने का अर्थ यह है कि भारत सरकार एवं राज्य सरकारें इस भाषा के विकास व संवर्धन के लिए कार्य करेगी। फलस्वरूप ईसील के निदेशक मंडल के मार्गदर्शन में आज ईसीएल के प्रागंण में संथाली भाषा दिवस समारोह का आयोजन किया गया है।
उप महाप्रबंधक (अधिकारी अधिस्थापना) श्री देवाशीष आचार्या द्वारा सभा को संबोधित करते हुए कहा गया कि संथाल जनजाति में राजनैतिक संगठन गाँव पंचायत से प्रारंभ होती है, जिसका प्रधान मांझी कहलाता है। मांझी का सहायक जोग मांझी कहलाता है। जोग मांझी का प्रमुख कार्य अपनी जनजाति के लोगों के आचरण का ध्यान रखना एवं विवाह संबंधी समस्याओं को सुलझाना है। जन्म एवं विवाह के अवसर पर जोग मांझी के सलाह से ही कार्य सम्पन्न किए जाते हैं। देखिए, संथालियों की कितनी उन्नत संस्कृति है कि अपने समाज में लोगों के छोटे से छोटे आचरण पर भी ध्यान देते हैं। उन्हें पथभ्रष्ट होने से रोकते है और उन्हें अच्छे कार्य में प्रवृत्त करते है।
संथाली भाषा दिवस समारोह की शुरूआत अतिथियों के आगमन पर संथाली महिलाओं द्वारा स्वागत नृत्य प्रस्तुत करते हुए उन्हें सभागार तक ले गए। अतिथियों का सम्मान संथाली रीति से संपन्न किया गया। अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं संथाली लिपि ओल चिकी के जनक रघुनाथ मुर्मु की छवि पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर समारोह को गति प्रदान की। तत्पश्चात कोल इंडिया कार्पोरेट गीत की प्रस्तुति, स्वागत भाषण किया गया। सुश्री माही सरेन द्वारा “जोहार जोहार माराङ्ग बुरू” पर बालिका एकल नृत्य प्रस्तुति दी गई। फिर संथाली महिला नृत्य प्रस्तुति, सुश्री श्रावणी चौधरी, उप प्रबंधक (ई एण्ड टी) एवं राजभाषा कर्मी सुश्री सुमेधा भारती द्वारा संथाली समाज व संस्कृति पर वक्तव्य, नीमजोड़ा स्कूल के बच्चों द्वारा संथाली बालिका नृत्य प्रस्तुति, राजभाषा कर्मी के श्रीमती नमिता माझी सरेन द्वारा संथाली लिपि ओल चिकी पर वक्तव्य, संथाली संस्कृति पर नाट्य प्रस्तुति, बांकुड़ा जिले से आए संथालियों द्वारा संथाली पुरूष नृत्य प्रस्तुति, जनसंपर्क विभाग के श्री जयराम मुर्मु द्वारा संथाली महानायक सिद्धू-कान्हू की जीवनी पर वक्तव्य, सोदपुर वर्क्सशॉप के एक कर्मी की पुत्री सुश्री श्रेया मुर्मु द्वारा संथाली बालिका नृत्य (एकल) प्रस्तुति, गणमान्य जनों का अभिभाषण, पुरस्कार वितरण एवं धन्यवाद ज्ञापन से संथाली भाषा दिवस समारोह, 2022 सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
समारोह में संथाली लिपि ओल चिकी के प्रचार-प्रसार के लिए संथाली अक्षर के हिंदी, बांग्ला, ओड़िया एवं अंग्रेजी में समरूप अक्षर वाले कार्डों का वितरण किया गया।

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