एक साल से फरार दुष्कर्म आरोपी मात्र एक घंटे में गिरफ्तार
आसनसोल: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की "जीरो टॉलरेंस" नीति को धरातल पर उतारते हुए, आसनसोल-दुर्गापुर कमिश्नरेट पुलिस ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता और त्वरित न्याय के संकल्प को सिद्ध किया है। डिसड़गढ़ मस्जिदपाड़ा की एक 27 वर्षीय पीड़िता की आपबीती पर पुलिस ने जिस तत्परता से काम किया, उसने अपराधियों में कानून का भय और आम जनता में सुरक्षा का विश्वास फिर से जगा दिया है।कुलटी थाना अंतर्गत सांकतोड़ीया आउटपोस्ट में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, आरोपी मंजूर आलम पिछले एक साल से पीड़िता को डरा-धमका कर उसका शारीरिक शोषण कर रहा था। आरोपी को कथित राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण पीड़िता लंबे समय तक खामोश रहने को मजबूर थी।सूचना मिलते ही सांकतोड़ीया आई.सी. विनय दास के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बिना किसी दबाव के तुरंत कार्रवाई की। महज एक घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने मुख्य आरोपी मंजूर आलम को सलाखों के पीछे भेज दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को 4 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। यह वही आई.सी. विनय दास हैं, जिन्होंने हाल ही में एक नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को भी एक घंटे के भीतर दबोचकर अपनी कार्यशैली का लोहा मनवाया था।यह कार्रवाई महज एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि इस बात का उद्घोष है कि न्याय के मंदिर में अब अपराधियों को कोई राजनीतिक कवच नहीं बचा पाएगा। आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस ने साबित कर दिया है कि खाकी का फर्ज केवल फाइलें बंद करना नहीं, बल्कि पीड़िताओं के आंसुओं को पोंछकर उन्हें न्याय दिलाना है। पुलिस का यह रुख स्पष्ट संकेत देता है कि "जीरो टॉलरेंस" का अर्थ अब केवल नीति नहीं, बल्कि एक अटूट प्रतिज्ञा है।
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