तीन शीर्ष कमांडरों ने 20 साल बाद छोड़ा जंगल
बांकुड़ा(तारकेश्वर राय ): कभी जंगलमहल की पगडंडियों पर खौफ का पर्याय रहे तीन शीर्ष माओवादी कमांडरों ने हिंसा का रास्ता हमेशा के लिए छोड़ दिया है। बुधवार को बांकुड़ा पुलिस लाइन में राज्य पुलिस के एडीजी (पश्चिमी क्षेत्र) आनंद कुमार, आईपीएस के समक्ष दो दशक का वनवास खत्म कर इन्होंने मुख्यधारा में वापसी की।सरेंडर करने वालो मे रीजनल कमांडर रामप्रसाद मांडी उर्फ सचिन, और जोनल कमेटी मेंबर जवा महतो व नयनतारा साहू।इन्होंने 1 AK-47, 2 INSAS राइफल्स, 10 मैगजीन और 154 जिंदा कारतूस पुलिस को सौंपे—ये वही हथियार हैं जो कभी सुरक्षा बलों से लूटे गए थे।तीनों पर पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में हत्या, UAPA और विस्फोट के 80 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। ये सभी साल 2006 से सक्रिय थे।सरेंडर के दौरान तीनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने वंचितों के हक के लिए हथियार उठाया था, लेकिन अब उन्हें यह अहसास हो गया है कि हिंसा और बंदूक से किसी बदलाव की उम्मीद बेमानी है।इस मोके पर एडीजी आनंद कुमार, आईपीएस ने कहा कि इन सभी को पश्चिम बंगाल सरकार की 'सरेंडर-सह-पुनर्वास नीति' का पूरा लाभ दिलाया जाएगा। इस मौके पर डीआईजी अभिषेक मोदी आईपीएस एवं जिले के एसपी पीवीजी सतीश, आईपीएस सहित कई अधिकारी उपस्थित थे. दो दशकों के खूनी संघर्ष के बाद इन कमांडरों का आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि विकास और मुख्यधारा की रोशनी जब सुदूर इलाकों तक पहुँचती है, तो बंदूकें खुद-ब-खुद खामोश हो जाती हैं। यह भटके हुए अन्य युवाओं के लिए एक साफ संदेश है कि जंगल में अंधेरा है, और भविष्य केवल मुख्यधारा के साथ जुड़कर ही सुरक्षित हो सकता है।
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