बंगाली नववर्ष के उपलक्ष्य में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल दुर्गापुर में भजन संध्या और श्रीमद्भगवतगीता प्रसंग एवं प्रवचन का आयोजन

बंगाली नववर्ष के उपलक्ष्य में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल दुर्गापुर में भजन संध्या और श्रीमद्भगवतगीता प्रसंग एवं प्रवचन का आयोजन

दुर्गापुर(अमन राय) : पोहेला बोइशाख, जिसे बंगाली नव वर्ष के रूप में भी जाना जाता है, बांग्लादेश और भारत के बंगाली भाषी राज्यों, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक त्योहार है। यह त्योहार बंगाली कैलेंडर के पहले दिन मनाया जाता है। इस साल यह 15 अप्रैल को मनाया गया। पोहेला बोइशाख की उत्पत्ति मुगल साम्राज्य के समय से देखी जा सकती है, जहां इसे फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता था। 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में बंगाली पुनर्जागरण के दौरान इस त्योहार को महत्व मिला जब रवींद्रनाथ टैगोर और काजी नजरुल इस्लाम जैसे महान हस्तियों ने इसे प्रतिपादित, पल्लवित और प्रस्फुटित किया एवं सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ इसे अपने कार्यों में शामिल किया। पोहेला बोइशाख का स्वागत बंगाली समुदाय बहुत जोश के साथ करते हैं। 15 अप्रैल को ग्रुप केन्द्र, केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल दुर्गापुर में दुनिया भर के बंगाली समुदायों के बीच पोहेला बोइशाख बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। जैसे कि इस दिन को रंगीन परेड, पारंपरिक संगीत और नृत्य प्रदर्शन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों द्वारा चिह्नित किया जाता है। लोग पारंपरिक पोशाक पहनते और आने वाले वर्ष में शांति, समृद्धि और खुशी की कामना करते हुए एक-दूसरे को बधाई देते है | वैसे ही सम्पूर्ण ग्रुप केन्द्र में समस्त अधिकारियों एवं कार्मिकों ने क्षेत्रीय परिधि को दरकिनार करते हुए एक दुसरे को बधाई देते हुए दिन को हर्षोल्लास के साथ मनाया। सायं काल में बैकुंठ धाम चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में बैकुंठ धाम सत्संग दल द्वारा ग्रुप केन्द्र,दुर्गापुर में श्रीमद् भागवत गीता प्रसंग एवं प्रवचन और भजन संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य व्यास पीठ से श्री प्रसून कुमार महाराज जी एवं उनकी संगीत मंडली ने भक्ति योग,ध्यान योग एवं कर्मयोग की एक ऐसी गंगा प्रवाहित की जिसमें सभी स्त्रोता मंत्र-मुग्ध हो गयेे। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि श्री मद्भागवतीगीता अत्यंत सरल और सरस श्लोकों में आध्यात्मिक चिंतन के साथ-साथ लोक-व्यवहार के निर्देश प्रस्तुत करने वाली धर्म-ग्रंथ है, जो तनावरहित जीवन जीने की कला सिखाती है, जीवन-मृत्यु के चक्र का स्पष्टीकरण देती है, ईश्वर के प्रति अपने-अपने तरीके से निष्ठा रखने का मंत्र देती है और प्रतीक रूप में यह समझा देती है कि इस जीवन का उद्देश्य स्वयं को भौतिकवादी बंधनों से मुक्त करना है। हमारे पिछले जन्म के कर्मों को चुकाने और अधूरे कर्तव्यों को पूरा करने के लिए, क्योंकि यदि हम फिर से पैदा हुए हैं तो इसका मतलब है कि हमारे पिछले जन्मों के कुछ लंबित कर्मों को पूरा करना होगा। गीता में लिखा है बिना कर्म के जीवन बना नहीं रह सकता। कर्म से मनुष्य को जो सिद्धि प्राप्त हो सकती है, वह तो संन्यास से भी नहीं मिल सकती। भगवान कृष्ण हमें सिखाते हैं कि सब कुछ एक कारण से होता है । जो कुछ हुआ, अच्छे के लिए हुआ। जो कुछ हो रहा है, अच्छे के लिए हो रहा है। जो होगा अच्छा ही होगा। महाभारत के मुताबिक श्री कृष्ण ने सबसे बड़े धर्मयुद्ध महाभारत में अपने शिष्य अर्जुन को कुछ उपदेश दिए थे, जिससे उस युद्ध को जीतना अर्जुन के लिए आसान हो गया था। गीता के उपदेशों को जीवन का सार या जीवन के उपदेश भी कहते हैं। वहीं अगर हिन्दू धर्म के इस महान ग्रंथ गीता के उपदेशों को अपने जीवन में सम्मिलित कर लिया जाए तो मूर्ख व्यक्ति के जीवन का भी बेड़ा पार हो सकता है। इसके साथ ही इस महान ग्रंथ गीता में जीवन की वास्तविकता और मनुष्य धर्म से जुड़े उपदेश दिए गए हैं। कई बार ऐसा होता है कि हमें अपनी समस्या का समाधान नहीं मिलता या फिर विपत्ति के समय हमें बहुत परेशान हो जाते हैं। कई लोग तो गुस्से में अपना आपा खो बैठते हैं या फिर अपनी समस्याओं से विचलित होकर भाग खड़े होते हैं, ऐसे में गीता में लिखे गए यह उपदेश हमारी सारी समस्याओं का चुटिकयों में हल कर देते हैं और हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं साथ ही सफल जीवन की प्रेरणा देते हैं। भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध में अर्जुन को गीता का उपदेश सुनाए थे जिसे सुनकर अर्जुन को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। वहीं यह गीता का उपदेश युद्ध भूमि में खड़े अर्जुन के लिए नहीं था बल्कि यह सम्पूर्ण मानव जाति के लिए हैं और यह उपदेश एक तरीके से लोगों के जीवन में सफलता पाने के लिए अचूक मंत्र भी है। कार्यक्रम में ग्रुप केन्द्र केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के पुलिस उप महानिरीक्षक श्री देवव्रत भट्टाचार्य,कमाण्डेंट श्री रामनिवास सेखू सहित दुर्गापुर एवं आसपास के शहरों के गणमान्य अतिथि गण, लब्ध प्रतिष्ठित लोग, सम्मानित महिलायें, आम लोग, कैम्प परिसर के अधिकारी एवं जवान एवं बच्चे उपस्थित थे।


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